Tuesday, March 22, 2022

पुस्तक उपहार-2022


प्यारे बच्चों, 
विद्यालय में सत्र 2022-23 हेतु पुस्तक उपहार कार्यक्रम आरम्भ हो रहा है | 
पुस्तक उपहार कार्यक्रम के द्वारा आप अपनी पुरानी किताबें विद्यालय के पुस्तकालय में दे सकते है | ये पुस्तकें उन छात्रों को दी जायेंगी, जिनकी इनको आवश्यकता है | आप अपने इस महत्वपूर्ण कदम से किसी बच्चे की मदद करने के साथ ही वृक्षों एवं पर्यावरण की सुरक्षा भी कर सकते है | 
यह कार्यक्रम मार्च- से अप्रैल तक चलेगा | 
पुस्तक उपहार हेतु कुछ नियम दिए जा रहे है, जिनका पालन करके ही आप इस कार्यक्रम में सफलतापूर्वक भाग ले सकते सकते है | 

1) आप जिन पुस्तकों को विद्यालय के पुस्तकालय में देंगे, वे अच्छी स्थिति में हो, फटी हुई न हो | 
2) पाठ्यपुस्तक के साथ ही आप सन्दर्भ पुस्तकें भी दे सकते है | 
3) विद्यालय के प्रथम पाली के समयानुसार सुबह 8 से 1.20 तक आप पुस्तकें दे सकते है | 
4) आपको भी अगर किसी पुस्तक की आवश्यकता है तो, आप उपहार में दी गई पुस्तकों से ले सकते है | 
5) पुस्तकें देते समय COVID नियमों का पालन करें | 
6) पुस्तकें अत्यधिक पुरानी न हो | 

कृपया उन पुस्तकों को विद्यालय पुस्तकालय में न दे,जिनका छात्र उपयोग न कर सकें (अत्यधिक पुरानी एवं वे पुस्तकें जिनकी स्थिति उपयोग करने योग्य न हो) | 

मीरा पांडे

(पुस्तकालय अध्यक्ष)

Shaheed Diwas (23 MARCH) Remembering Shaheed Bhagat Singh, Sukhdev and Rajguru


Shaheed Diwas is observed on March 23 every year to mark the death anniversary of Indian freedom fighters Bhagat Singh, Shivaram Rajguru and Sukhdev Thapar.

On March 23, 1931, the three were hanged to death by the Britishers in the Lahore Central Jail in British India (now Pakistan). The valiant patriots were sentenced to death in the Lahore conspiracy case and ordered to be hanged on March 24, 1931. However, they were executed on March 23, 1931 at 7:30 pm, almost 11 hours before the scheduled time for the hanging.

Following the death of one of India's most prominent freedom fighters, Lala Lajpat Rai, in November 1928, the trio vowed to avenge Rai's killing. Rai, who led a non-violent protest against the Simon Commission, inspired many young Indians to join Indian independence movement against the Britishers. Rai had succumbed to injuries sustained during a lethal lathi charge ordered by British police officer James A Scott, who was infamous for his cruel behaviour.

With a motive to teach British forces a lesson, Singh, Rajguru and Sukhdev planned to execute Scott. Singh had publicly declared to execute Scott. However, the trio mistook British police officer John Saunders for Scott and allegedly fatally shot him. Following the shootout, Singh continued his freedom struggle. Meanwhile, the Britishers charged the three freedom fighters for Saunders' killing.

In April 1929, Singh along with his accomplice Batukeshwar Dutt, set off two explosive devices without hurting anyone inside the Central Legislative Assembly in Delhi. They, then, allowed themselves to be arrested, while shouting the famous freedom struggle slogan, "Inquilab Zindabad", or "Long live the revolution".

The trio's contribution in the Indian freedom struggle is invaluable. The brave sons of Mother India continue to inspire generations to fight for their rights and freedom. On their martyrdom day today, let's remember the sacrifices of our brave freedom fighters.

(From: Times Now News)

Tuesday, January 25, 2022

गणतंत्र दिवस-2022




1947 में देश को ब्रिट‍िश राज से स्‍वतंत्रता तो मिल गई थी, लेकिन उसके पास अपना संविधान नहीं था| 26 जनवरी 1950 को भारत को अपना संविधान मिला| इसी दिन भारतीय संविधान लागू हुआ और इसी के साथ भारत एक संप्रभु राज्‍य बन गया, जिसे गणतंत्र घोष‍ित किया गया | डॉ बीआर अंबेडकर ने संविधान की मसौदा समिति की अध्यक्षता की और इसे गणतंत्र घोष‍ित किया गया, इसलिये इस दिन को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है| गणतंत्र दिवस समारोह का मुख्य आकर्षण परेड है जो राजपथ, दिल्ली से शुरू होती है और इंडिया गेट पर समाप्त होती है| इस दिन देश के राष्ट्रपति राजपथ, नई दिल्ली में झंडा फहराते हैं| इस दिन कल्‍चरल प्रोग्राम के साथ भारतीय सेना, भारतीय नौसेना और भारतीय वायु सेना भी भारत की सांस्कृतिक और सामाजिक विरासत, परेड और एयरशो के जरिये प्रदर्शित करते हैं|

26 जनवरी को ही क्यों लागू किया गया संविधान

26 जनवरी 1950 में इस दिन संविधान लागू किया गया था, जिसके कई कारण थे। देश स्वतंत्र होने के बाद 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा ने संविधान अपनाया था। वहीं, 26 जनवरी 1950 को संविधान को लोकतांत्रिक सरकार प्रणाली के साथ लागू किया गया। इस दिन भारत को पूर्ण गणतंत्र घोषित किया गया। 26 जनवरी को संविधान लागू करने का एक प्रमुख कारण यह भी है कि सन् 1930 में इसी दिन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारत की पूरी तरह से आजादी की घोषणा की थी।

सन् 1929 को पंडित जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में इंडियन नेशनल कांग्रेस के जरिये एक सभा का आयोजन किया गया था। जिसमें आम सहमति से इस बात का ऐलान किया गया कि अंग्रेजी सरकार, भारत को 26 जनवरी 1930 तक डोमिनियन स्टेटस का दर्जा दे। इस दिन पहली बार भारत का स्वतंत्रता दिवस मनाया गया था। 15 अगस्त 1947 को आजादी मिलने तक 26 जनवरी को ही स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता था। 26 जनवरी 1930 को पूर्ण स्वराज घोषित करने की तारीख को महत्व देने के लिए 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू किया गया और 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस घोषित किया गया।

308 सदस्‍यों ने बनाया था संविधान

देश में आज जिस संविधान के अनुसार कार्य किया जा रहा है, उसका मसौदा डॉ. भारत रत्न बाबा साहेब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने तैयार किया था जिन्हें भारतीय संविधान के वास्तुकार के रूप में जाना जाता है। कई सुधारों और बदलावों के बाद कमेटी के 308 सदस्यों ने 24 जनवरी 1950 हाथ से लिखे कानून की दो कॉपियों पर हस्ताक्षर किये, जिसके दो दिनों बाद 26 जनवरी को यह देश में लागू कर दिया गया। 26 जनवरी के महत्व को बनाए रखने के लिए उसी दिन भारत को एक लोकतांत्रिक पहचान दी गई थी। संविधान के लागू होने के बाद पहले से चले आ रहे अंग्रेजों का कानून Government of India Act (1935) को भारतीय संविधान के जरिये भारतीय शासन दस्तावेज के रूप में बदल दिया गया। इसलिए हर साल हम भारतवासी 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाते है।

सुबह 10.18 बजे गणतंत्र राष्ट्र बना भारत

भारत 26 जनवरी 1950 को सुबह 10 बजकर 18 मिनट पर एक गणतंत्र राष्ट्र बना। उसके ठीक 6 मिनट बाद 10 बजकर 24 मिनट पर डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने भारत के पहले राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। इस दिन पहली बार डॉ. राजेन्द्र प्रसाद राष्ट्रपति के रूप में बग्गी पर बैठकर राष्ट्रपति भवन से बाहर निकले थे, जहां उन्होंने पहली बार सेना की सलामी ली थी और पहली बार उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया था। इस दिन हम भारतवासी तिरंगा फहराने, राष्ट्रगान करने के साथ-साथ कई कार्यक्रमों का या तो आयोजन करते हैं या फिर उसका हिस्सा बनते हैं।

एक सप्‍ताह का होता है गणतंत्र दिवस कार्यक्रम

गणतंत्र दिवस का कार्यक्रम आम तौर पर 24 जनवरी से राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार पाने वाले बच्चों के नाम का ऐलान करने के साथ शुरू होता है। लेकिन इस बार यह 23 जनवरी को नेताजी सुभाषचंद्र बोस की जयंती से शुरू हो गया है। वहीं 25 जनवरी की शाम राष्ट्रपति देश के नाम संबोधन देते हैं। 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस का मुख्य कार्यक्रम आयोजित किया जाता है।

इस दौरान राजपथ पर परेड निकाली जाती है। 27 जनवरी को प्रधानमंत्री परेड में शामिल हुए एनसीसी कैडेट के साथ मुलाकात करते हैं। वहीं 29 जनवरी को रायसीना हिल्स पर बीटिंग द रिट्रीट कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। इस दौरान तीनों सेनाओं के बैंड शानदार धुन के साथ मार्च पास्ट करते हैं। इसी के साथ गणतंत्र दिवस का कार्यक्रम खत्म होता है।


(साभार : इंडिया टुडे और नवभारत टाइम्स )



Monday, December 13, 2021

KVS Foundation Day-2021



The Kendriya Vidyalaya Sangathan (KVS) formerly chain of Central Schools is a system of central government schools in India that are authorized by the Ministry of Education (MoE), Government of India. The system was established on 15 December 1963 under the name ‘Central Schools’. Later the name was changed to Kendriya Vidyalaya. A uniform curriculum is followed by all Kendriya Vidyalayas all over India. 

The Kendriya Vidyalaya Sangathan provides a common syllabus and It also provides a common system of education to the children of transferable Central Government employees including Defence and Para-Military personnel. These schools have been operational for more than 50 years.

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